
चंबा। स्टेट फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और रीजनल साइंस लैब नार्दर्न रेंज धर्मशाला की ओर से मिंजर मेले प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने किया। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में पहली बार फोरेंसिक साइंस की प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में फोरेंसिक विभाग अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसी सिलसिले में प्रदेश के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मेलों में प्रदर्शनी के माध्यम से फोरेंसिक विभाग की ओर से सुलझाए गए मामलों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर स्टेट फोरेंसिक लैब के डायरेक्टर डा. अरुण शर्मा, डा. मीनाक्षी महाजन, डा. नीति प्रकाश दुबे और जसवंत सिंह मौजूद रहे। फोरेंसिक साइंस का प्रयोग अपराधी को अपराध से जोड़ने एवं निर्दोष को अपराध से बरी कराने में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए किया जाता है। इन सभी बातों के बारे में प्रदर्शनी में बताया जा रहा है। डा. मीनाक्षी महाजन ने बताया कि फोरेंसिक विभाग पिछले 25 वर्षाें से प्रदेश में कार्य कर रहा है। कई मामले ऐसे होते हैं, जिनको पुलिस सुलझा नहीं पाती, तब फोरेंसिक साइंस विशेषज्ञों की सहायता अपराध की घटना को सुलझाने और सही जानकारी प्राप्त करने के लिए ली जाती है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य यह भी है कि एक आम नागरिक अपराध घटित होने के बाद घटना स्थल को खराब न करें। इससे सही भौतिक साक्ष्य अपराध घटना स्थल से एकत्रित किए जा सकते हैं और अपराधी की सही पहचान की जा सकती है। इसके अलावा इस प्रदर्शनी से विद्यार्थी वर्ग को फोरेंसिक साइंस के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी में आम जनता को जाली करंसी की पहचान, डूबने से बचाव, आगजनी का सही कारण ढूंढने, मादक पदार्थों के तस्करी रोकने और इससे होने वाले नुकसान के बारे अवगत करवाया जा रहा है। वहीं, पीएनए फिंगर प्रिंटिंग के बारे में बताया जा रहा है। डा. मीनाक्षी ने बताया कि हत्या के मामलों में जले हुए शव के कंकाल से व्यक्ति विशेष की पहचान करना कैसे संभव है, यह भी प्रदर्शनी में बताया जा रहा है।
